ज़ीवन की वास्तविकता
आपका मन कितना भी पवित्र हो अगला आपको उसी के भाव से पढ़ेगा और निर्णीत भी स्वयं के अनुसार ही करेगा। जितना अपने आप को प्रमाणित करने का प्रयास करोगे उतने ही दोषी साबित होंगे। अतः अपने धर्म का ध्यान रखते हुए कर्म करते चलिए न्यायोचित परिणाम आएगा । समय आज परीक्षण का है कल परिणाम का होगा और आप विजेता भी होंगे बस अपने कर्मों पर विश्वास रखिये। जीवन का परम सत्य है कि हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हैं और हमें एक-दूसरे के साथ सहयोग करना चाहिए, परिवर्तन हमेशा संभव है और हमें इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए.
😡😡*"योगी"* 😡😡
Comments
Post a Comment