मानवीय संवेदना

मानवीय संवेदनाओं के मूल्य तब समझ आता है जब व्यक्ति स्वयं कठिन परिस्थिति में होता है और उस समय हम अपेक्षा करते हैं कि हमें प्रकृति सहयोग करे, हम यह भूल जाते हमारा अतीत क्या रहा ।

"पंडित योगी"

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