मूल्य

व्यक्ति, वस्तु या किसी उपलब्धि की कीमत तब तक होती है जब तक वह प्राप्त नहीं होती, प्राप्त होने के उपरांत उसका मूल्य शनैः-शनैः कम होता जाता है, जब सुबह की धूप निकलती है तो सब को प्रिय रहती है पर दिन चढ़े वही अप्रिय हो जाती है फिर उसकी कीमत दिन ढलने पर समझ आती है और कईयों के लिए वह अंतिम साबित होती है। 
समय पर समय का मूल्य जान लेना अत्यावश्यक है

"योगी"

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