तुलनात्मक अनुपात
मानवीय तुलनात्मक अनुपात
मानव जीवन बड़ा ही संघर्षशील है यहाँ जिस तराजू में आप तौले जाते हैं उसमें संदेह का पड़ला सदैव भारी रहता है, सत्य और संदेह कभी सम नहीं हो सकते यह भी उतना ही कटु सत्य है जितना प्रकाश की अनुपस्थिति में अंधकार का होना सास्वत है, मानवीय संवेदना का कोई मूल्य नहीं। जो इस परिस्थिति में स्थिर रह गया वो सम्भवतः स्वयं को सिद्ध कर दे अन्यथा जीवन की नदी कि प्रवाह के साथ सभी प्रवाहित हो रहे हैं।
पं. योगेश संतोष भारद्वाज "योगी"
शिक्षक एवं प्रेरक
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